भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की Section 190 of BNS in Hindi एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह धारा बताती है कि जब कोई गैरकानूनी जमाव (unlawful assembly) किसी सामान्य उद्देश्य के लिए इकट्ठा होता है और उस जमाव का कोई सदस्य अपराध करता है — तो उस जमाव के सभी सदस्य उस अपराध के लिए दोषी माने जाएंगे। यह कानून सामूहिक अपराध जिम्मेदारी (group liability criminal law) की नींव रखता है।
सरल शब्दों में कहें तो — अगर आप किसी गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा हैं और उस भीड़ में से किसी ने मारपीट या नुकसान किया, तो आप भी दोषी हो सकते हैं। भले ही आपने खुद कुछ न किया हो। यही इस धारा की सबसे अहम बात है।
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गैरकानूनी सभा का प्रत्येक सदस्य सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में किए गए अपराध का दोषी है — Bharatiya Nyaya Sanhita 2023
BNS धारा 190 का पूरा पाठ इस प्रकार है:
“यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उद्देश्य को अग्रसर करने में सम्भाव्य जानते थे, तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा।”
यह प्रावधान दो स्थितियों में लागू होता है — पहला, जब अपराध सामान्य उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए किया गया हो। दूसरा, जब सदस्यों को पहले से पता था या होना चाहिए था कि ऐसा अपराध हो सकता है। यह common object law India का एक मजबूत आधार है।
BNS धारा 190 और IPC धारा 149 की तुलना
BNS की धारा 190 दरअसल पुरानी Indian Penal Code (IPC) की धारा 149 का नया और संशोधित रूप है। BNS vs IPC unlawful assembly के संदर्भ में दोनों का उद्देश्य एक ही है — भीड़ में हुए अपराध की सामूहिक जिम्मेदारी तय करना। हालांकि BNS में भाषा को सरल और अधिक स्पष्ट बनाया गया है ताकि अदालतों में व्याख्या आसान हो।
| पहलू | IPC धारा 149 | BNS धारा 190 |
| कानून | Indian Penal Code 1860 | Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 |
| उद्देश्य | सामूहिक अपराध दायित्व | सामूहिक अपराध दायित्व |
| भाषा | पुरानी, जटिल | सरल, आधुनिक |
| लागू होने की तिथि | 1860 से | 1 जुलाई 2024 से |
“सामान्य उद्देश्य” का क्या अर्थ है?
Common object ka kya arth hai law me — यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। सामान्य उद्देश्य (common object) का मतलब है वह साझा इरादा जो जमाव के सभी सदस्यों में मौजूद हो। यह जरूरी नहीं कि सभी ने मिलकर पहले से योजना बनाई हो। अगर सब एक ही मकसद से इकट्ठे हैं और उस मकसद के लिए कोई अपराध होता है तो सब जिम्मेदार हैं।
Group intention aur common object me antar समझना जरूरी है। Common intention (साझा इरादा) के लिए पहले से मिलकर योजना बनाना जरूरी होता है, लेकिन common object के लिए ऐसा नहीं। यही कारण है कि भीड़ द्वारा अपराध कानून के मामलों में यह धारा अधिक व्यापक और प्रभावी मानी जाती है।
क्या सिर्फ मौजूद रहने पर भी सजा मिल सकती है?
यह सबसे अहम सवाल है — kya sirf present hone par bhi saza milti hai? जवाब है — हाँ, कुछ परिस्थितियों में। अगर आप उस जमाव का हिस्सा हैं जो गैरकानूनी घोषित हो चुकी है और आपने उसे नहीं छोड़ा, तो आप उस जमाव के सदस्य माने जाएंगे। अदालत यह देखती है कि क्या आप उस सामान्य उद्देश्य में शामिल थे।
हालांकि, court kaise decide karta hai common object — यह तय करने के लिए न्यायालय सबूत, मौके पर उपस्थिति, व्यवहार और अन्य परिस्थितियों को देखती है। सिर्फ संयोगवश वहाँ मौजूद होने को आमतौर पर सदस्यता नहीं माना जाता। लेकिन सावधानी जरूरी है।
BNS 190 का व्यावहारिक उदाहरण
BNS 190 example ke sath samjhaiye — मान लीजिए 10 लोग एक साथ किसी की दुकान लूटने के इरादे से इकट्ठे हुए। उनमें से 3 ने दुकान में घुसकर सामान लूटा और 2 ने मालिक को मारपीट किया। बाकी 5 बाहर खड़े रहे। तो भी वे सभी 10 लोग उस अपराध के लिए दोषी माने जाएंगे — क्योंकि वे उसी गैरकानूनी जमाव का हिस्सा थे और सामान्य उद्देश्य में शामिल थे।
यह criminal law me joint liability का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। Mob violence me kanooni zimmedari इसी सिद्धांत पर काम करती है। कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी “मैंने खुद कुछ नहीं किया” कहकर बच न सके।
गैरकानूनी सभा की कानूनी परिभाषा
Unlawful assembly ka definition kya hai — यह BNS की धारा 189 में दिया गया है। पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों का वह जमाव जो किसी गैरकानूनी उद्देश्य के लिए इकट्ठा हो, “विधिविरुद्ध जमाव” कहलाता है। इसमें legal definition of unlawful assembly के अनुसार यह भी देखा जाता है कि उनका सामूहिक व्यवहार सार्वजनिक शांति के लिए खतरा है या नहीं।
Public disorder law India के तहत ऐसे जमावों को तितर-बितर करने का अधिकार पुलिस को दिया गया है। Illegal assembly punishment India में इसके सदस्यों को BNS की विभिन्न धाराओं के तहत सजा हो सकती है जो अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
Conclusion
Section 190 of BNS in Hindi भारतीय आपराधिक कानून का एक ताकतवर प्रावधान है जो सामूहिक अपराध को रोकने के लिए बनाया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ इसलिए जिम्मेदारी से नहीं बच सकता क्योंकि उसने खुद हाथ नहीं उठाया। अगर आप गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा हैं तो कानून आपको उतना ही जिम्मेदार मानता है जितना अपराध करने वाले को।
इसलिए यह जरूरी है कि आप जानें — किस भीड़ में शामिल हो रहे हैं और उसका उद्देश्य क्या है। criminal responsibility in mob के इस सिद्धांत को समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है। Indian law me mob crime kaise treat hota hai — इसका सबसे सटीक जवाब BNS की यह धारा देती है।

Daniel Cross is a legal researcher and freelance writer specializing in civil rights, policy analysis, and contemporary legal trends. With a strong background in academic writing and practical case review, he focuses on making complex legal concepts accessible to everyday readers while promoting clarity, fairness, and informed public discourse.