BNS Section 352 in Hindi – बीएनएस की धारा 352 क्या है (सजा, जमानत और पूरी जानकारी)

February 23, 2026

By: Daniel Cross

क्या आप जानते हैं कि किसी को जानबूझकर गाली देना या सार्वजनिक रूप से अपमान करना सिर्फ बुरी आदत नहीं — यह एक दंडनीय अपराध है? भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 ठीक इसी मुद्दे को संबोधित करती है। यह धारा उन लोगों पर लागू होती है जो जानबूझकर किसी का अपमान करके उसे इस हद तक उकसाते हैं कि सार्वजनिक शांति भंग होने की नौबत आ जाए।

पहले ऐसे मामलों में IPC की धारा 504 के तहत कार्यवाही होती थी। 1 जुलाई 2024 से BNS लागू होने के बाद अब धारा 352 उसकी जगह काम करती है। अगर आप BNS Section 352 in Hindi को पूरी तरह समझना चाहते हैं — इसकी सजा, जमानत, और यह कब लागू होती है — तो यह लेख अंत तक जरूर पढ़ें।

धारा 352 BNS का पूरा प्रावधान (शांति भंग करने की नीयत से जानबूझकर अपमान)

भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 कहती है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति का अपमान करता है चाहे वह शब्दों से हो, हाव-भाव से हो, या लिखित रूप में हो और उसका मकसद सामने वाले को उकसाना और सार्वजनिक शांति भंग करना हो, तो यह धारा 352 के तहत अपराध है। यह धारा समाज में आपसी सम्मान और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई गई है।

इससे पहले, यानी जब भारतीय दंड संहिता (IPC) लागू थी, ऐसे मामलों में IPC की धारा 504 के तहत कार्यवाही होती थी। 1 जुलाई 2024 से BNS के लागू होने के बाद, अब धारा 352 उसकी जगह काम करती है। सरल शब्दों में कहें तो अगर आप किसी को जानबूझकर इतना भड़काते हैं कि वह हिंसा पर उतर आए, तो आप इस धारा के दायरे में आते हैं।

BNS Section 352 के अपराध को साबित करने के लिए आवश्यक तत्व

किसी भी आपराधिक धारा के तहत दोषी ठहराने के लिए कुछ जरूरी तत्व साबित करने होते हैं। BNS 352 के मामले में भी कुछ निश्चित शर्तें हैं जो पूरी होनी चाहिए:

तत्वविवरण
जानबूझकर अपमानअपमान का कार्य जान-बूझकर, सोच-समझकर किया गया हो
उकसावे की नीयतआरोपी का इरादा पीड़ित को भड़काना हो
शांति भंग की संभावनाऐसी स्थिति बने कि झगड़ा या हिंसा हो सकती हो
गलती से नहींअनजाने में हुआ अपमान इस धारा के अंतर्गत नहीं आता

यह साबित करना भी जरूरी है कि आरोपी ने जो किया वह केवल भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि उकसाने की स्पष्ट नीयत से किया। अगर अपमान अनजाने में हुआ हो या कोई दुर्भावना न हो, तो यह धारा लागू नहीं होगी। शांति भंग करने की नीयत कैसे साबित होती है यह अक्सर घटना के संदर्भ, गवाहों और बयानों से तय होता है।

IPC धारा 504 और BNS धारा 352 में अंतर

बहुत से लोग पूछते हैं: BNS 352 और IPC 504 में क्या फर्क है? दोनों धाराएं मूल रूप से एक जैसे अपराध को कवर करती हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।

पहलूIPC धारा 504BNS धारा 352
लागू होने की तारीख1860 से 30 जून 2024 तक1 जुलाई 2024 से
सजा2 साल तक की कैद या जुर्माना2 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों
अपराध की प्रकृतिगैर-संज्ञेय, जमानतीगैर-संज्ञेय, जमानती
ट्रायलकोई भी मजिस्ट्रेटकोई भी मजिस्ट्रेट

मुख्य बदलाव यह है कि BNS 352 में सजा की भाषा थोड़ी अधिक स्पष्ट की गई है। इसके अलावा, BNS में अपराधों को आधुनिक संदर्भ में परिभाषित किया गया है जिसमें सोशल मीडिया पर किया गया जानबूझकर अपमान भी शामिल हो सकता है।

धारा 352 BNS में सजा का प्रावधान (Punishment)

BNS Section 352 punishment की बात करें तो दोषी पाए जाने पर अदालत दो साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों की सजा दे सकती है। सजा की मात्रा अपराध की गंभीरता, परिस्थितियों और न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करती है।

यह जरूरी नहीं कि हर मामले में जेल हो। कई बार अदालत केवल जुर्माने से भी मामला निपटा देती है, खासकर जब पहली बार का अपराध हो या मामला ज्यादा गंभीर न हो। हालांकि, अगर अपमान के साथ-साथ धमकी, शारीरिक हिंसा, या जाति-धर्म के आधार पर भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल हो, तो अन्य धाराएं भी जुड़ सकती हैं जिससे सजा बढ़ सकती है।

धारा 352 का अपराध जमानती है या नहीं? (Bail & Nature of Offence)

सीधे जवाब दें तो हाँ, BNS 352 में जमानत मिलती है। यह एक जमानती (Bailable) और गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) अपराध है।

इसका मतलब क्या है?

  • गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable): पुलिस इस मामले में बिना वारंट के गिरफ्तारी नहीं कर सकती। BNS 352 में पुलिस गिरफ्तारी तभी होगी जब मजिस्ट्रेट का आदेश हो।
  • जमानती (Bailable): आरोपी को जमानत पाने का अधिकार है। उसे बस मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देना होगा।

BNS 352 bail procedure संक्षेप में:

  1. पुलिस आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करती है
  2. आरोपी या उनके वकील जमानत आवेदन दाखिल करते हैं
  3. मजिस्ट्रेट अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों को देखकर जमानत देते हैं
  4. आमतौर पर इसमें ज्यादा देरी नहीं होती

यह भी जानना जरूरी है कि BNS 352 compoundable है या नहीं यह धारा compoundable अपराध है, यानी पीड़ित और आरोपी के बीच आपसी समझौता हो सकता है और मामला वापस लिया जा सकता है।

किन परिस्थितियों में BNS Section 352 लागू होती है महत्वपूर्ण उदाहरण

BNS 352 examples समझना जरूरी है ताकि आप असली जिंदगी में इसे पहचान सकें।

उदाहरण 1 बाजार में अपमान: साहिल एक घंटे से लाइन में खड़ा था। विशाल आया और उससे आगे घुस गया। जब साहिल ने टोका, तो विशाल ने उसे जानबूझकर गालियाँ दीं और इतना भड़काया कि वहाँ मारपीट जैसी स्थिति बन गई। यह BNS 352 के तहत अपराध है।

उदाहरण 2 सोशल मीडिया पर अपमान: क्या सोशल मीडिया पर अपमान BNS 352 में आएगा? हाँ, अगर कोई जानबूझकर किसी को ऑनलाइन इस तरह अपमानित करे कि उकसावे की नीयत स्पष्ट हो, तो यह धारा लागू हो सकती है।

उदाहरण 3 धार्मिक या जातिगत अपमान: अगर कोई किसी की जाति या धर्म के आधार पर अपमानजनक टिप्पणी करे और उसका मकसद हिंसा भड़काना हो, तो BNS 352 के साथ अन्य धाराएं भी जुड़ सकती हैं।

उदाहरण 4 अफवाह फैलाना: झूठी और भड़काऊ अफवाहें फैलाना जो किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाएँ और हिंसा को बढ़ावा दें यह भी इस धारा के दायरे में आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले

भारतीय अदालतों ने IPC 504 (जो अब BNS 352 है) से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में स्पष्टता दी है।

Ramesh vs. State of Bihar इस मामले में अदालत ने माना कि अपमान तभी इस धारा के तहत आएगा जब उकसावे की नीयत स्पष्ट हो। महज कड़वे शब्द बोलना पर्याप्त नहीं है आरोपी का इरादा भी साबित होना चाहिए।

हाई कोर्टों ने भी यह स्पष्ट किया है कि insult leading to violence law India के तहत हर विवाद इस धारा में नहीं आता। जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे से बहस कर रहे हों और कोई स्पष्ट उकसावा न हो, वहाँ अदालत मामले को खारिज भी कर सकती है। यही वजह है कि शिकायत दर्ज करते समय घटना का पूरा विवरण और गवाहों की जानकारी देना जरूरी होता है।

इस धारा के साथ लगने वाली अन्य आम धाराएं

BNS 352 अकेले भी लागू हो सकती है, लेकिन अक्सर यह अन्य धाराओं के साथ जोड़ी जाती है। आमतौर पर साथ लगने वाली धाराएं:

  • BNS 351 किसी को धमकी देना
  • BNS 296 अश्लील हरकत करना
  • BNS 191 दंगा भड़काना
  • BNS 126 किसी का रास्ता रोकना
  • BNS 127 किसी को जबरदस्ती कैद करना
  • BNS 356 मानहानि (Defamation)

इन धाराओं का साथ लगना मामले को ज्यादा गंभीर बना देता है और सजा भी बढ़ सकती है। इसलिए अगर आप पर ऐसा कोई मामला दर्ज हो, तो तुरंत किसी अनुभवी वकील से सलाह लेना जरूरी है।

Conclusion

BNS Section 352 in Hindi को समझना हर उस नागरिक के लिए जरूरी है जो अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक रहना चाहता है। यह धारा बताती है कि जानबूझकर किसी का अपमान करना और उसे शांति भंग करने के लिए उकसाना सिर्फ सामाजिक बुराई नहीं यह एक दंडनीय अपराध है। चाहे अपमान बाजार में हो, सोशल मीडिया पर हो, या किसी सार्वजनिक जगह पर कानून आपके साथ है।

अगर कोई आपका अपमान करके आपको भड़काने की कोशिश करे, तो खुद कानून हाथ में न लें। बल्कि शांति से पुलिस में शिकायत दर्ज करें और किसी अच्छे वकील की सलाह लें। याद रखें कानून की ताकत आपके पास है, बस इसका सही इस्तेमाल करना आना चाहिए।

FAQ’s

जानबूझकर अपमान करने पर कौन सी धारा लगती है? 

भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 लागू होती है, जो पहले IPC की धारा 504 थी। यह तब लागू होती है जब अपमान जानबूझकर और उकसावे की नीयत से किया गया हो।

गाली देने पर कौन सी धारा लगती है? 

अगर गाली देना जानबूझकर किया जाए और इससे शांति भंग होने की संभावना हो, तो BNS Section 352 लागू होती है। परिस्थितियों के अनुसार BNS 351 या BNS 356 भी जोड़ी जा सकती है।

क्या BNS 352 में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है? 

नहीं। यह एक गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) अपराध है इसलिए पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

BNS Section 352 में कितनी सजा है? 

दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो साल की कैद, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। सजा की मात्रा मामले की गंभीरता पर निर्भर करती है।

क्या BNS 352 में आपसी समझौता हो सकता है? 

हाँ, यह एक compoundable अपराध है। पीड़ित और आरोपी आपसी सहमति से मामला सुलझा सकते हैं और शिकायत वापस ली जा सकती है।

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